जैव-चिकित्सीय अनुसंधान में पशु प्रयोग रोगों को समझने, रोकने, उपचार करने और उनका इलाज खोजने के बेहतर तरीकों को विकसित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्तमान में जैविक प्रणालियों का स्थान लेने के लिए विकल्प बहुत ही सीमित हैं। नई दवाओं पर अनुसंधान और औषधीय उत्पादों/टीकों/जैविक अनुसंधान की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षणों में पशु प्रयोग की आवश्यकता होती है।
रोगों के निदान और उपचार के लिए नई और अधिक प्रभावी विधियों के विकास हेतु अनुसंधान में पशुओं का उपयोग अनिवार्य है, जो मानवों और पशुओं दोनों को प्रभावित करते हैं। वस्तुतः नई दवाओं/टीकों के विकास में प्राप्त प्रत्येक महत्वपूर्ण सफलता प्रत्यक्ष रूप से पशु अनुसंधान का परिणाम रही है। भारत में बहुत ही सीमित संख्या में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संस्थाएं पूर्व-नैदानिक परीक्षण में संलग्न हैं।
शैक्षणिक/अनुसंधान संस्थानों, फार्मा और बायोटेक उद्योगों से बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए, पूर्व-नैदानिक अनुसंधान के लिए एक अत्याधुनिक संसाधन सुविधा की आवश्यकता महसूस की गई। निजी और सरकारी संगठनों के हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद, राष्ट्रीय पशु संसाधन सुविधा जैव-चिकित्सीय अनुसंधान हेतु (NIPCR) की स्थापना का निर्णय लिया गया। तेलंगाना राज्य सरकार ने जीनोम वैली, जो कि राज्य का बायोटेक हब है, में 100 एकड़ भूमि नि:शुल्क प्रदान की।
माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय समिति ने 18 नवंबर 2015 को NIPCR की स्थापना को स्वीकृति दी। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 दिसंबर 2015 को आदेश जारी किए और इसके पश्चात भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने 1 जनवरी 2016 को NIPCR को ICMR के अधीन एक स्थायी संस्थान के रूप में स्थापित करने की अधिसूचना जारी की।
विकासात्मक जीव विज्ञान, प्रजनन जीव विज्ञान, तंत्रिका जीव विज्ञान, व्यवहार विज्ञान, हृदय विज्ञान, स्टेम सेल, आणविक कोशिका जीव विज्ञान, प्रतिरक्षा विज्ञान और विषाणु विज्ञान के क्षेत्रों में प्रयोगशाला पशुओं पर बुनियादी और पूर्व-नैदानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाना और समर्थन देना।
अनुसंधान के लिए विशिष्ट रोगजनक मुक्त (एसपीएफ) गुणवत्ता वाले पशुओं का सृजन/प्रजनन/रखरखाव करना।
पशु प्रयोगों और संसाधनों पर व्यापक ग्रंथसूची संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना।
शैक्षणिक संस्थानों/अनुसंधान एवं विकास संस्थानों/उद्योगों के साथ सहयोग के माध्यम से संसाधनों तक पहुंच प्रदान करना।
अपनी अत्याधुनिक अवसंरचना सुविधाओं के साथ मानव और पशु स्वास्थ्य के लिए चिकित्सा उपकरण, निदान, नई चिकित्सा पद्धति विकसित करने के लिए शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, जैव प्रौद्योगिकी, जैव फार्मा और जैव चिकित्सा अनुसंधान संगठनों को समर्थन प्रदान करना।
भारत सरकार की ओर से औषधियों/टीकों और चिकित्सा उपकरणों के लिए परीक्षण एवं प्राधिकरण संस्थान के रूप में कार्य करना।